मोदी सरकार का ये कानून खा सकता है महिलाओं की नौकरी, पढ़ें क्या है

महिलाओं के लिए खड़ी हुई नई मुसीबत, भारत में आज रोजगार के हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों का वर्चस्व तोड़ रही हैं। खासकर व्यावसायिक शिक्षा हासिल करने वाली महिलाओं के काम का दायरा बहुत बढ़ा है। लेकिन कामयाबी के बावजूद भी उन्हें कम ही आंका जाता है। भारत जैसे पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं पर घर संभालने की जिम्मेदारी ज्यादा रहती है।

1. महिलाओं के लिए सरकार ने खड़ी की नई मुसीबत
ऐसे में अगर महिलायें इस सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर अपने लिए कुछ करना भी चाहे तो यहाँ कि सरकार भी उन्हें सपोर्ट नहीं देती। नौकरी में क्षेत्र में बात करें तो आज महिलाओं कि स्थिति ये है कि प्राइवेट कंपनिया आज उन्हें नौकरी देने के लिए तैयार नहीं है। इसकी वजह है सरकार द्वारा बनाया गया मेटरनिटी कानून।

2. सर्वे में सामने आये चौंका देने वाले आंकड़े
भारत में मेटरनिटी बेनिफिट में सुधार महिलाओं को करियर के प्रति आगे बढ़ने पर प्रोत्साहित करने के लिए बनाया गया था। लेकिन ये कानून आज उनके विपरीत काम कर रहा है। आपको बता दें कि बहुत जल्द ही मेटरनिटी बेनिफिट कानून का विपरीत प्रभाव देखने को मिल सकता है। इस बात का खुलासा एक सर्वे में हुआ है। टीमलीज सर्विसेज ने एक सर्वे जारी किया है। टीमलीज ने मैन्यूफैक्चरिंग, बीपीओ/आईटीईएस, रियल एस्टेट, एजुकेशन, रिटेल, टूरिज्म, ई-कॉमर्स समेत 10 प्रमुख सेक्टरों में नौकरी देने वाली 300 कंपनियों का सर्वे किया था

3. महिलाओं को नहीं मिल रही नौकरी
इसमें सर्वे में बताया गया है कि भारत ने ये कानून महिलाओं को बेनिफिट देने के लिए बनाया था लेकिन यही अब उनकी नौकरी जाने का कारण बन सकता है। सर्वे में सामने आये आंकड़ों के मुताबिक, नए कानून से देशभर में करीब 18 लाख महिलाओं की नौकरी जा सकती है।

4. 2019 में 18 लाख महिलाओं की जा सकती है नौकरी
आपको बता दें कि पिछले साल मेटरनिटी बेनिफिट एक्ट (संशोधित) लाकर संगठित सेक्टरों में मेटरनिटी बेनिफिट के तहत कामकाजी महिलाओं की वेतन सहित छुट्टियां 12 सप्ताह से बढ़ा कर 26 सप्ताह की गई थी। लेकिन इस नए कानून की वजह से मार्च 2019 में 10 सेक्टर्स में तकरीबन 11 लाख लेकर 18 लाख अपनी नौकरी खो सकती हैं।

5. कंपनियां नहीं उठाएंगी महिलाओं की मेटरनिटी का खर्चा
इसकी वजह ये है कि प्राइवेट सेक्टर में मेटरनिटी बेनिफिट कानून कंपनियों का बोझ बढ़ाने वाला प्रावधान है। क्योंकि कंपनियों पर बढ़ने वाले इस खर्चे को बांटने के लिए उसने कोई प्रावधान नहीं किया है। जिसके चलते अब कंपनिया महिलाओं के बढ़ते खर्च को उठाने से कतरा रही हैं। और महिलाओं को हायर करने की जगह पुरुषों को नौकरियां दे रही है।

6. पुरुषों को किया जा रहा हायर
40 फीसदी कंपनियों ने कहा कि महिलाओं को हायर करते वक्त वह इस बारे में जरूर सोचेंगे कि उन पर कंपनी को कितना ज्यादा खर्च करना होगा। उनका कहना है कि सरकार महिलाओं का खर्च उठा सकती है, क्योंकि हम टैक्स भरते हैं। लेकिन प्राइवेट सेक्टर में ऐसे मुमकिन नहीं है।

भारत जैसे देश में यहाँ महिलायें अभी तक आज़ादी से जी नहीं पा रही हैं, वहां पर महिलाओं के लिए बनाये गए कानून भी महज एक दिखावे की तरह है। सरकार सिर्फ घोषणाएं कर चुप्पी साध लेती हैं। लेकिन इसके आगे महिलाओं को कई परेशानियों से झूझना पड़ता है।

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