यूपी में बेटियों पर अत्याचार जारी, फोन नंबर देने से मना किया तो युवक ने दलित लड़की को जिंदा जलाया

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट योगी आदित्यनाथ की सरकार नकली अपराधियों का फर्जी एनकाउंटर तो खूब कर रही है। लेकिन असली अपराधी के ज़ेहन में न सीएम योगी का खौफ है न उनके एनकाउंटर का! उत्तर प्रदेश की बद्तर कानून व्यवस्था का ताजा उदाहरण देखने को मिला है आजमगढ़ में। आजमगढ़ के फरहा गांव एक दलित लड़की के घर में घुसकर उसे जिंदा जला दिया गया। घटना आठ अप्रैल मंगलवार दिन की है। युवक ने नाबालिग दलित लड़की को इसलिए आग लगा दी, क्योंकि उसने अपना मोबाइल नंबर को उसको देने से इंकार कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी उसी गांव का मोहम्मद शाई है। पुलिस का कहना है कि मोहम्मद शाई पीड़िता के घर गया कथित तौर पर लड़की को अपना मोबाइल नंबर देने के लिए दबाव डाला। लड़की ने अपना नंबर देने से इंकार कर दिया, तो कथित रूप से उसकी पिटाई की और केरोसिन तेल छिड़क कर उसे आग लगा दी।

लड़की 80% जल चुकी है। फिर भी पीड़िता ने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। बयान के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पीड़िता के परिवार ने एससी एसटी आयोग से मुलाकात की है।

जनसत्ता में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि युवक-युवती एक-दूसरे के दोस्त थे और फोन के जरिए बातचीत करते थे। इस दौरान लड़की ने अचानक आरोपी से बातचीत बंद कर दी। लेकिन सवाल तो ये है कि क्या उत्तर प्रदेश में अपराध करने से पहले कानून का ख्याल नहीं आता?

और अगर नहीं आता तो क्यों नहीं आता? शायद इसलिए नहीं आता क्योंकि सरकार कानून व्यवस्था लागू करने में सफल नहीं हुई है। इस मामले में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनिल यादव ने लिखा है कि ‘आजमगढ़ में 17 साल की दलित युवती को बेरहमी से पीटने के बाद आग के हवाले कर दिया जाता है। जानते है कि क्यों, क्योंकि एक मनचले को नम्बर देने से मना कर दिया। बाबा! एनकाउंटर का भय नही, कहीं तुम्हारी तो शय नहीं??’

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