मोदी सरकार की बढ़ीं मुश्किलें – आज आएगा अविश्वास प्रस्ताव, साबित करना होगा बहुमत

नई दिल्ली। आगामी 2019 लोकसभा चुनावों से एक साल पहले मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती है। एनडीए के सहयोगी दलों की बगावत ने उसे अग्निपरीक्षा देने पर मजबूर कर दिया है। टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस आज सदन में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने को लेकर उठी मांग के चलते चार सालों में पहली बार बीजेपी को सदन में अपना बहुमत साबित करके दिखाना होगा। अविश्वास प्रस्ताव को विपक्षी दलों द्वारा समर्थन मिलने की उम्मीद जातई जा रही है।

शुक्रवार को ही कोशिश की गई थी अविश्वास प्रस्ताव लाने की
इससे पहले शुक्रवार को भी अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास किया गया था, लेकिन हंगामे के कारण उसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका, जिसके कारण वाईआरएस कांग्रेस व तेदपा ने नए सिरे से सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया है जिस पर चर्चा होने की संभावना है।

इस प्रस्ताव को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, एआईएडीएमके, एआईएमआईएम और आम आदमी पार्टी ने भी समर्थन करने की घोषणा की है। इसके बावजूद अन्य विपक्षी दलों का इस प्रस्ताव को समर्थन मिलेगा या नहीं इस पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं, क्योंकि विपक्ष जानता है कि लोकसभा में राजग का बहुमत होने के कारण इस अविश्वास प्रस्ताव का गिरना तय है।

केंद्र की ओर से आंध्रप्रदेश को विशष दर्जा दिए जाने से इनकार के बाद सबसे पहले वाईएसआर कांग्रेस ने पिछले हफ्ते अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया था। वहीं लंबे समय से बीजेपी की सहयोगी रही टीडीपी ने इसके बाद सरकार से अपना नाता तोड़ने का फैसला किया और खुद ही अविश्वास प्रस्ताव लाई। दोनों पार्टियां अपने- अपने नोटिसों पर समर्थन जुटाने के लिए विपक्षी दलों को लामबंद कर रही हैं।

सदन में पेश होने के लिए किसी भी नोटिस को कम से कम 50 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है। उधर सरकार ने अपने बहुमत का भरोसा जता दिया है। कहा है कि अगर अविश्वास प्रस्ताव सदन में पेश भी हुआ तो वह उसे लोकसभा में परास्त कर देगी। 539 सदस्यों वाली लोकसभा में भाजपा के पास खुद के 274 सदस्य हैं, जबकि बहुमत के लिए 270 सदस्यों की ही जरूरत है।

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