नीरव मोदी की ज़ब्त संपत्ति का ब्यौरा देने से ED ने किया इनकार, क्या एक भ्रष्टाचारी को बचा रही है मोदी सरकार ?

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरटीआई कानून के तहत नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की जांच के दौरान जब्त संपत्ति का खुलासा करने से इंकार कर दिया। ये इनकार इसलिए नहीं पचता क्योंकि घोटाले के बाद सरकार इस बात की ख़ुशी जता रही थी कि नीरव मोदी की हज़ारों करोड़ की संपत्ति ज़ब्त कर ली गई है। लेकिन कार्रवाई पूरी होने के बाद अब जानकारी नहीं दी जा रही है।

बता दें, कि पीएनबी बैंक में 13,600 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। एक टीवी चैनल ने घोटाले से जुड़े दस्तावेज़ों के आधार पर इस घोटाले को 29000 करोड़ रुपये का बताया है। इस घोटाले में आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके मामा मुहल चौकसी हैं। घोटाला सामने आने से पहले ही ये दोनों पूरे परिवार के साथ देश छोड़कर भागने में कामयाब हो गए।

नीरव मोदी देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के रिश्तेदार हैं। मुकेश अंबानी को मोदी सरकार का करीबी माना जाता है। स्विटज़रलैंड के दावोस शहर में हुए वर्ल्ड इकनोमिक फोरम की बैठक में नीरव मोदी को भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ देखा गया था।

पुणे के आरटीआई ऐक्टिविस्ट विहार ध्रुवे ने ईडी से नीरव मोदी और मेहुल चौकसी को भारत वापस लाने के लिए अधिकारियों के यात्रा खर्च, भारत व विदेश में वकीलों को सलाह के लिए दी गई फीस आदि से संबंधित जानकारी मांगी थी।

उन्होंने नीरव और मेहुल की कंपनियों को जारी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग, उनके द्वारा ली गई राशि और ईडी द्वारा जब्त संपत्तियों का ब्योरा भी मांगा थी। गौरतलब है कि पहले ईडी ने ट्विटर पर बताया था कि नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी की 7,664 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।

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